21/10/2020

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जाने क्या है प्याज़ की कीमत बढ़ने की वजह, खराब फसल या कुछ और

जाने क्या है प्याज़ की कीमत बढ़ने की वजह, खराब फसल या कुछ और

जाने क्या है प्याज़ की कीमत बढ़ने की वजह, खराब फसल या कुछ और

इतिहासकारों के मुताबिक खेती की शुरुवात से पहले हमारे पूर्वज जंगली प्याज़ खाया करते थे, उनका यह भी कहना है के प्याज़ की खेती कोई 5 साल पहले शुरू की गयी थी और प्याज़ दुनियाभर में खाने का हिस्सा रहा है।
प्याज़ के बारे में कई किताबो में बताया गया है जैसे बाइबल,कुरान,चरक संहिता में प्याज़ को एक औषधि क रूप में ऑंखें,दिल,जोड़ो के लिए फायदेमंद बताया गया ह।
प्राचीन मिस्र के लोग परत दर परत खुलने वाली प्याज़ को शाश्वतता का प्रतीक मान इसकी पूजा करते थे.
प्याज़ कई रूपों में खायी जाती है जब कुछ खाने को न हो तो प्याज़ क साथ रोटी खायी जाती है, सलाद क रूप में भी प्याज़ को बहुत पसंद किया जाता है, अब भारत में इसी प्याज़ की कीमत बहुत बढ़ गयी है, मंगलवार को दिल्ली में प्याज़ की कीमत 50 रूपए प्रति किलो थ।
एक ठेले वाला प्याज़ 40 रूपए में बेच रहा था जब उस से पूछा गया के मंडी में प्याज़ 50 रूपए प्रति किलो है तोह आप 40 रूपए क्यों बेच रहे हो उसने कहा मेरे पास पुराना ख़रीदा हुआ प्याज़ है इसलिए मई 40 रूपए में बेच रहा हु मंडी में 50 रूपए ही मिल रहा ह।
आढ़ती बोल रहे है की पीछे से प्याज़ कम् आ रहा है इसलिए और महंगा हो सकता ह।
दिल्ली की आज़ादपुर मंडी में मंगलवार को प्याज़ के थोक कीमत 22 रूपए से लेकर 37 रूपए प्रति किलो थ।
प्याज़ की बढ़ती कीमत के साथ राजनीति भी तेज़ हो जाती है।
सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए कहा की लोगो की जेब में पहले की पैसे नहीं है रोजी रोटी, नौकरी, सब जा रहा है ऊपर से कमर तोड़ देने वाली महंगाई की मार, कहा गयी अब मोदी सरकार उन्होंने यह भी कहा के महंगाई और मोदी सारकार दोनों देश के लिए हानिकारक ह।
अब क्यों की बिहार में चुनाव है बिहार सरकार नहीं चाहती के महंगाई मुद्दा बने क्यों की भारत में चुनाव क समय हर बार प्याज़ के दामों का राजनीति को प्रभावित करने का इतिहास रहा ह।
दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों 1998 में प्याज़ की बढ़ती क़ीमतें एक बड़ा मुद्दा थी।
प्याज़ के बिना तो भारतीय खाना अधूरा है इसलिए चाहे प्याज़ की कीमत जितनी चाहे बढ़ जाए लोग प्याज़ खाना नहीं छोड़ेंगे और न ही प्याज़ की मांग में कमी आएग।
प्याज़ आँखों में आंसू लाता है अब यही आंसू किसान की आँखों में है और अब नेताओ को डर है कही उनको न रोना पड़े शायद इसलिए ही अब भागदौड़ में लगे ह।